न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः |
अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः ||१०-२||
na me viduḥ suragaṇāḥ prabhavaṃ na maharṣayaḥ .
ahamādirhi devānāṃ maharṣīṇāṃ ca sarvaśaḥ ||10-2||
।।10.2।। मेरे प्रकट होनेको न देवता जानते हैं और न महर्षि; क्योंकि मैं सब प्रकारसे देवताओं और महर्षियोंका आदि हूँ।