Verse 10.3

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् |
असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते ||१०-३||

yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaram .
asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate ||10-3||

Meaning

।।10.3।। जो मनुष्य मुझे अजन्मा, अनादि और सम्पूर्ण लोकोंका महान् ईश्वर जानता है अर्थात् दृढ़तासे मानता है, वह मनुष्योंमें असम्मूढ़ (जानकार) है और वह सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त हो जाता है।