यदक्षरं वेदविदो वदन्ति
विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः |
यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति
तत्ते पदं संग्रहेण प्रवक्ष्ये ||८-११||
yadakṣaraṃ vedavido vadanti viśanti yadyatayo vītarāgāḥ .
yadicchanto brahmacaryaṃ caranti tatte padaṃ saṃgraheṇa pravakṣye ||8-11||
।।8.11।। वेदवेत्ता लोग जिसको अक्षर कहते हैं, वीतराग यति जिसको प्राप्त करते हैं और साधक जिसकी प्राप्तिकी इच्छा करते हुए ब्रह्मचर्यका पालन करते हैं, वह पद मैं तेरे लिये संक्षेपसे कहूँगा।