Verse 10.5

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः |
भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः ||१०-५||

ahiṃsā samatā tuṣṭistapo dānaṃ yaśo.ayaśaḥ .
bhavanti bhāvā bhūtānāṃ matta eva pṛthagvidhāḥ ||10-5||

Meaning

।।10.4 -- 10.5।। बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश -- प्राणियोंके ये अनेक प्रकारके और अलग-अलग (बीस) भाव मेरेसे ही होते हैं।