Verse 13.29

समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् |
न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ||१३-२९||

samaṃ paśyanhi sarvatra samavasthitamīśvaram .
na hinastyātmanātmānaṃ tato yāti parāṃ gatim ||13-29||

Meaning

।।13.29।।क्योंकि सब जगह समरूपसे स्थित ईश्वरको समरूपसे देखनेवाला मनुष्य अपने-आपसे अपनी हिंसा नहीं करता, इसलिये वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है।