न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते |
न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति ||३-४||
na karmaṇāmanārambhānnaiṣkarmyaṃ puruṣo.aśnute .
na ca saṃnyasanādeva siddhiṃ samadhigacchati ||3-4||
।।3.4।। मनुष्य न तो कर्मोंका आरम्भ किये बिना निष्कर्मताको प्राप्त होता है और न कर्मोंके त्यागमात्रसे सिद्धिको ही प्राप्त होता है।